व्हीकल-टू-होम (V2H) तकनीक के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी का उपयोग घरों के लिए पावर बैंक के रूप में किया जा सकता है। नेचर एनर्जी में प्रकाशित शोध के अनुसार, इस तकनीक से शाम के पीक आवर्स में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी, वाहन के जीवनकाल में 3,800 डॉलर तक की बचत होगी और 24 से 57 टन तक कार्बन उत्सर्जन कम किया जा सकेगा।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : नई रिसर्च में खुलासा, व्हीकल-टू-होम चार्जिंग से प्रति वाहन 24 से 57 टन तक कार्बन उत्सर्जन में हो सकती है कमी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अब केवल परिवहन का स्वच्छ विकल्प ही नहीं, बल्कि घरों के लिए बिजली के भंडारण और आपूर्ति का महत्वपूर्ण साधन भी बन सकते हैं। एक नए शोध के मुताबिक, व्हीकल-टू-होम (V2H) तकनीक के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी में जमा बिजली को जरूरत के समय वापस घरों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इससे शाम के व्यस्त समय में बिजली की मांग पूरी करने के लिए कोयला, प्राकृतिक गैस और अन्य जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता घटाई जा सकेगी। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल नेचर एनर्जी में प्रकाशित हुआ है। इसमें अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के स्कूल फॉर एनवायरनमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी तथा फोर्ड मोटर कंपनी के शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों की द्विदिशात्मक चार्जिंग क्षमता का अध्ययन किया है।
शोधकर्ताओं ने अमेरिका के विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु परिस्थितियों, वाहन चलाने के पैटर्न, घरेलू बिजली की खपत और भविष्य में बिजली उत्पादन के स्वच्छ होने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए 15 वर्षों के वाहन जीवनकाल का मॉडल तैयार किया। व्हीकल-टू-होम तकनीक में इलेक्ट्रिक वाहन को ऐसे समय चार्ज किया जाता है, जब बिजली सस्ती और अपेक्षाकृत स्वच्छ उपलब्ध होती है।
उदाहरण के लिए, दिन के समय जब सौर ऊर्जा का उत्पादन अधिक होता है, तब वाहन की बैटरी में बिजली जमा की जा सकती है। इसके बाद शाम को, जब घरों में बिजली की मांग बढ़ती है और ग्रिड से मिलने वाली बिजली अपेक्षाकृत अधिक प्रदूषणकारी होती है, तब वाहन की बैटरी से बिजली वापस घर में भेजी जा सकती है।
इस प्रक्रिया से बिजली की मांग को अलग-अलग समय में संतुलित करने में मदद मिलती है। साथ ही, अचानक बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होने वाले पीकर पावर प्लांट पर दबाव कम किया जा सकता है। ऐसे संयंत्र आमतौर पर प्राकृतिक गैस और अन्य जीवाश्म ईंधन से बिजली पैदा करते हैं।
अध्ययन के अनुसार, सामान्य चार्जिंग व्यवस्था की तुलना में अनुकूलित V2H प्रणाली से एक परिवार को वाहन के पूरे जीवनकाल में औसतन 3,800 डॉलर की बिजली और चार्जिंग लागत बच सकती है। अलग-अलग क्षेत्रों में यह बचत 2,400 से 5,600 डॉलर तक हो सकती है। शोध में चार्जिंग लागत में 40 से 90 प्रतिशत तक कमी की संभावना भी जताई गई है।
पर्यावरण के लिहाज से भी इसके परिणाम महत्वपूर्ण हैं। शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, एक इलेक्ट्रिक वाहन में स्वचालित V2H प्रणाली अपनाने से उसके 15 वर्षों के जीवनकाल में 24 से 57 मीट्रिक टन तक कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन की भरपाई की जा सकती है। इसका औसत मध्यवर्ती अनुमान 38 मीट्रिक टन है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि अमेरिका के 69 प्रतिशत काउंटियों में, जहां लगभग 62 प्रतिशत आबादी रहती है, घरेलू बिजली की खपत से होने वाले उत्सर्जन में बचत वाहन को चार्ज करने से उत्पन्न उत्सर्जन से अधिक हो सकती है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, अधिकांश निजी वाहन अपने कुल समय के 90 प्रतिशत से अधिक समय तक पार्क रहते हैं। ऐसे में उनकी बैटरियों का इस्तेमाल घरेलू ऊर्जा भंडारण के लिए किया जा सकता है। इससे कई घरों को अलग से बड़े स्थायी बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने की जरूरत भी कम हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी और घरों में हीट पंप सहित अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ेगा, V2H तकनीक के फायदे भी बढ़ेंगे।
हालांकि, इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए द्विदिशात्मक चार्जर की उपलब्धता, बिजली कंपनियों की अनुकूल दर व्यवस्था, बेहतर स्वचालित नियंत्रण प्रणाली और उन्नत वाहन बैटरियों की जरूरत होगी। शोध का निष्कर्ष है कि इलेक्ट्रिक वाहन भविष्य में केवल परिवहन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन को कम करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे घरों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने और बिजली ग्रिड को अधिक स्थिर बनाने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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