अगस्त 2026 को वैश्विक स्तर पर अब तक का सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया है, जो जुलाई 2023 के साथ संयुक्त रूप से अब तक का सबसे गर्म महीना भी रहा। यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, इस दौरान वैश्विक औसत सतही वायु तापमान 16.96 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पूर्व-औद्योगिक स्तर से करीब 1.65 डिग्री सेल्सियस ऊपर है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानवजनित जलवायु परिवर्तन और मजबूत होते अल नीनो के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके प्रभाव से महासागरों का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के सक्रिय रहने के कारण 2027 तक नए तापमान रिकॉर्ड बन सकते हैं और भीषण गर्मी का यह दौर आगे भी जारी रह सकता है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: अगस्त 2026 को वैश्विक स्तर पर अब तक का सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया है और यह जुलाई 2023 के साथ संयुक्त रूप से अब तक का सबसे गर्म महीना भी रहा। दुनिया की प्रमुख जलवायु निगरानी एजेंसियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बढ़ते वैश्विक तापमान के पीछे मानवजनित जलवायु परिवर्तन के साथ मजबूत होते अल नीनो की अहम भूमिका रही है।
यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, अगस्त में वैश्विक औसत सतही वायु तापमान 16.96 डिग्री सेल्सियस रहा। यह 2023 और 2024 के पिछले अगस्त रिकॉर्ड से अधिक था और जुलाई 2023 के तापमान से 0.01 डिग्री सेल्सियस से भी कम अंतर पर रहा।
अगस्त का तापमान 1991-2020 के औसत से 0.85 डिग्री सेल्सियस अधिक और 1850-1900 के अनुमानित पूर्व-औद्योगिक स्तर से करीब 1.65 डिग्री सेल्सियस ऊपर रहा। यह नवंबर 2025 के बाद पहला ऐसा महीना भी रहा जब वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।
ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़कर महासागरों की सतह का तापमान भी अगस्त में रिकॉर्ड या संयुक्त रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के नेशनल सेंटर्स फॉर एनवायरनमेंटल इंफॉर्मेशन ने भी अगस्त 2026 को 1850 से शुरू हुए उसके रिकॉर्ड में सबसे गर्म अगस्त बताया।
NOAA के अनुसार, वैश्विक तापमान 20वीं सदी के औसत से 1.32 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। उत्तरी गोलार्ध में दर्ज मौसम विज्ञान संबंधी गर्मी भी रिकॉर्ड स्तर पर रही। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से उत्पन्न मानवजनित जलवायु परिवर्तन ने इस असाधारण गर्मी की पृष्ठभूमि तैयार की है, जबकि प्रशांत महासागर में तेजी से मजबूत हो रहा अल नीनो इसे और बढ़ा रहा है।
यूरोप, उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका और प्रशांत क्षेत्र के कई हिस्सों में जमीन और समुद्र दोनों पर असामान्य गर्मी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि सक्रिय अल नीनो आने वाले महीनों में जारी रहने और और मजबूत होने की संभावना है। इसके कारण 2026 और 2027 दोनों के बेहद गर्म वर्षों में शामिल होने की आशंका बढ़ गई है।
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि गर्मी की यह स्थिति आगे भी जारी रह सकती है और 2027 तक नए तापमान रिकॉर्ड बनने की संभावना बनी हुई है। बढ़ते तापमान का असर पहले से ही दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भीषण गर्मी, जंगलों की आग और अन्य चरम मौसम घटनाओं के रूप में दिखाई दे रहा है। इससे लोगों के स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र, कृषि और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
जलवायु एजेंसियों ने स्थिति की लगातार निगरानी पर जोर देते हुए कहा है कि वैश्विक तापमान में और वृद्धि को सीमित करने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तेजी से और प्रभावी कटौती करना आवश्यक है।
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