By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Reading: अगले दो दशकों में भारत में हर साल 15–40 अतिरिक्त अत्यधिक गर्म दिन आने का अनुमान
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • ईको सिस्टम
  • कचरा-प्रबंधन
  • फ्यूचर ग्रीन
  • ओपिनियन
  • मल्टीमीडिया
Search
  • ईको सिस्टम
    • जल
    • जंगल
    • जमीन
    • हवा
    • खनिज
    • जैव-विविधता
    • गतिविधियां
  • कचरा-प्रबंधन
    • ग्रीन बिजनेस
    • रीसाइकलिंग
    • इन्नोवेशन
    • इनिशिएटिव्स
  • फ्यूचर ग्रीन
    • ऊर्जा
    • सस्टेनिबिलिटी
    • इलेक्ट्रिक व्हीकल
    • कृषि एवं खाद्य
  • ओपिनियन
    • विचार
    • इम्पैक्ट फीचर
    • स्टोरी
  • मल्टीमीडिया
    • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > ईको सिस्टम > हवा > अगले दो दशकों में भारत में हर साल 15–40 अतिरिक्त अत्यधिक गर्म दिन आने का अनुमान
AI Image
हवा

अगले दो दशकों में भारत में हर साल 15–40 अतिरिक्त अत्यधिक गर्म दिन आने का अनुमान

Environment Pulse
Last updated: September 5, 2026 9:15 pm
Environment Pulse
Published: September 5, 2026
Share
AI Image
SHARE

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) के AI-संचालित प्लेटफॉर्म ‘CRAVIS’ के विश्लेषण के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण अगले दो दशकों में भारत को हर साल 15 से 40 अतिरिक्त अत्यधिक गर्म दिनों का सामना करना पड़ सकता है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। जलवायु परिवर्तन की तेज होती रफ्तार के बीच भारत को आने वाले दो दशकों में हर वर्ष 15 से 40 अतिरिक्त असामान्य रूप से गर्म दिनों का सामना करना पड़ सकता है। नई जलवायु projections के अनुसार, देश के कई हिस्सों में गर्म रातों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की आशंका है, जिससे स्वास्थ्य, ऊर्जा, श्रम उत्पादकता और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

ये अनुमान काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर (CEEW) द्वारा विकसित AI-संचालित जलवायु इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म CRAVIS (Climate Resilience Analytics and Visualisation Intelligence System) के विश्लेषण पर आधारित हैं।

यह प्लेटफॉर्म भविष्य की जलवायु परिस्थितियों की तुलना 1981–2010 के जलवायु आधार वर्ष से करता है। CRAVIS के अनुसार, ‘असामान्य रूप से गर्म दिन’ उन दिनों को माना गया है जब किसी जिले का दैनिक औसत तापमान उस जिले के 90वें प्रतिशतक तापमान की सीमा से ऊपर पहुंच जाता है।

आने वाले वर्षों में कई क्षेत्रों में हर साल 20 से 40 अतिरिक्त असामान्य रूप से गर्म रातें दर्ज होने का अनुमान है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बदलाव केवल दिन के तापमान में वृद्धि से अधिक गंभीर हो सकता है, क्योंकि रात में तापमान कम नहीं होने से मानव शरीर को दिनभर की गर्मी से उबरने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता। लगातार गर्म रातें विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, बाहरी वातावरण में काम करने वाले श्रमिकों और अन्य संवेदनशील आबादी के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकती हैं।

इसके साथ ही एयर-कंडीशनिंग और कूलिंग उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की मांग और ऊर्जा खर्च में भी वृद्धि होने की संभावना है। CRAVIS ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले जलवायु प्रभावों को भी रेखांकित किया है। भारत में मौजूद 281 डेटा सेंटरों में से आधे से अधिक ऐसे तापमान वाले क्षेत्रों में हैं जहां साल में 90 से अधिक दिनों तक तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है।

अनुमानों के मुताबिक, 2040 तक करीब 90 प्रतिशत डेटा सेंटर इस तरह के तापमान जोखिम का सामना कर सकते हैं। इससे सर्वरों को ठंडा रखने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी और संचालन लागत बढ़ सकती है। दिल्ली में भी रात के तापमान को लेकर चिंता बढ़ रही है। जिन दिनों न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहता है, उनकी संख्या वर्तमान में लगभग 180 दिन प्रति वर्ष है।

अगले 25 वर्षों में यह संख्या 210 दिनों से अधिक हो सकती है। इसका अर्थ है कि दिल्ली में सालाना लगभग एक अतिरिक्त महीने तक कूलिंग की जरूरत पड़ सकती है।

इससे न केवल गर्मियों में बिजली की पीक मांग बढ़ेगी, बल्कि पूरे वर्ष बिजली की कुल खपत में भी इजाफा होने की संभावना है। अनुमानों में महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों सहित मध्य एवं तटीय भारत में गर्म दिनों की संख्या में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि का संकेत मिला है।

इन क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी के साथ चरम वर्षा की घटनाओं में भी वृद्धि का जोखिम सामने आया है। जलवायु परिवर्तन का यह दोहरा प्रभाव—एक तरफ बढ़ती गर्मी और दूसरी तरफ अधिक तीव्र वर्षा—शहरी बुनियादी ढांचे, कृषि, जल प्रबंधन और आपदा प्रबंधन प्रणालियों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है।

CRAVIS भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) और अन्य संस्थानों के 40 वर्षों से अधिक के सार्वजनिक डेटा का इस्तेमाल करता है। यह सैकड़ों जलवायु संकेतकों के आधार पर जिला स्तर पर विश्लेषण उपलब्ध कराता है और विभिन्न उत्सर्जन एवं वैश्विक तापमान वृद्धि परिदृश्यों के तहत वर्ष 2070 तक के अनुमान प्रस्तुत करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन अनुमानों को केवल भविष्य की चेतावनी के रूप में देखने के बजाय नीति निर्माण का आधार बनाया जाना चाहिए।

बढ़ती गर्मी के अनुरूप हीट एक्शन प्लान, ऊर्जा-कुशल और जलवायु-लचीला बुनियादी ढांचा, बेहतर शहरी नियोजन तथा कृषि और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में अनुकूलन उपायों को मजबूत करने की जरूरत होगी। भारत में तापमान वृद्धि अब केवल मौसम संबंधी चुनौती नहीं रह गई है।

बढ़ते गर्म दिन और गर्म रातें स्वास्थ्य से लेकर बिजली व्यवस्था, उद्योग, डिजिटल बुनियादी ढांचे और श्रम उत्पादकता तक अर्थव्यवस्था के लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में आने वाले दो दशकों की यह जलवायु चेतावनी तत्काल अनुकूलन और तैयारी की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

Also Read: सैटेलाइट ट्रैकिंग से खुलासा: तेजी से घटते प्राकृतिक घास के मैदानों पर अत्यधिक निर्भर है लुप्तप्राय लेसर फ्लोरिकन

You Might Also Like

डस्ट पोर्टल 2.0 लॉन्च, निर्माण स्थलों पर एआई से होगी धूल प्रदूषण की सख्त निगरानी
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में लखनऊ देश में नंबर-1, वार्ड-70 को भी मिला सर्वश्रेष्ठ वार्ड का सम्मान
आर्थिक संवाद से आगे बढ़कर पर्यावरणीय शासन पर फोकस बढ़ा रहा BRICS: भारत
प्रवाल विरंजन का सबसे बड़ा वैश्विक संकट, दुनिया की करीब 84% प्रवाल भित्तियां प्रभावित
Subsidy scheme accelerates EV adoption in state, Lucknow is no. 1 in applications
TAGGED:CEEW CRAVIS PlatformClimate Change India HeatwaveData Center Temperature RiskExtra Hot Days and NightsExtreme Weather Adaptation
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
(फोटो सौजन्य-एआई)
ईको सिस्टमजमीनजलसस्टेनिबिलिटीस्टोरी

भीषण सूखे से रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा डेन्यूब नदी का जलस्तर, पानी में डूबे द्वितीय विश्व युद्ध के नाज़ी युद्धपोत आए बाहर

Environment Pulse
Environment Pulse
August 10, 2026
ओलों की मार के बीच हाई-डेंसिटी बागानों पर कश्मीर की नजर
Solar Milestone: India’s Domestic Solar PV Manufacturing Capacity Hits 100 GW
पूर्वोत्तर की मिट्टी में सदियों का ज्ञान, बदलते मौसम में खेती की नई राह
नितिन गडकरी ने विदर्भ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण अभियान चलाने का किया आह्वान

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Pratham Publisher and Informatics Private Limited. All Rights Reserved. | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?