दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने निर्माण स्थलों पर धूल प्रदूषण को रोकने के लिए ‘डस्ट पोर्टल 2.0’ लॉन्च किया है। यह एआई, जीआईएस मैपिंग और सेंसर आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों की रियल-टाइम निगरानी करेगा। इसमें उल्लंघन पर पीला, नारंगी और लाल रंग का अलर्ट सिस्टम और डिजिटल चालान की व्यवस्था है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: दिल्ली में निर्माण और विध्वंस स्थलों से होने वाले धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने डस्ट पोर्टल 2.0 लॉन्च किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने डीपीसीसी द्वारा विकसित इस उन्नत एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म का औपचारिक शुभारंभ किया।
इसका उद्देश्य राजधानी में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण उपायों की रियल-टाइम निगरानी और नियमों के उल्लंघन पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है। नया पोर्टल पुराने मैनुअल निगरानी तंत्र की जगह तकनीक आधारित व्यवस्था को मजबूत करता है। यह मुख्य रूप से 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले निर्माण स्थलों पर लागू किया जा रहा है।
दिल्ली में निर्माण गतिविधियों, सड़कों और मिट्टी से उठने वाली धूल प्रदूषण में बड़ी भूमिका निभाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गर्मियों में धूल से जुड़े स्रोत कुल वायु प्रदूषण में करीब 27 प्रतिशत और सर्दियों में लगभग 15 प्रतिशत योगदान करते हैं।
वहीं, PM10 में इसका योगदान करीब 66 प्रतिशत और PM2.5 में लगभग 38 प्रतिशत बताया गया है। डस्ट पोर्टल 2.0 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, GIS मैपिंग, 360 डिग्री PTZ कैमरे, PM2.5 और PM10 सेंसर, रियल-टाइम एनालिटिक्स और लाइव वीडियो फीड जैसी तकनीकों को एकीकृत किया गया है। निर्माण परियोजनाओं से जुड़े लोगों को पोर्टल पर अपने स्थलों का पंजीकरण कराना होगा।
GIS के माध्यम से साइट की सीमाएं दर्ज करने के साथ निर्धारित अंतराल पर सेल्फ-ऑडिट रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। निगरानी के तहत एंटी-डस्ट ग्रीन नेट, पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री के भंडारण को ढकना, वाहनों के टायर धोने की व्यवस्था, एंटी-स्मॉग गन, वायु गुणवत्ता सेंसर, CCTV कैमरे, निर्माण कचरे का उचित निस्तारण और श्रमिकों में जागरूकता जैसे मानकों की जांच की जाएगी।
पोर्टल उल्लंघनों के आधार पर रंग-आधारित अलर्ट सिस्टम भी संचालित करेगा। पीला अलर्ट शुरुआती चेतावनी, नारंगी अलर्ट मध्यम स्तर के अनुपालन उल्लंघन और लाल अलर्ट गंभीर उल्लंघन को दर्शाएगा। गंभीर मामलों में सिस्टम स्वतः संबंधित अधिकारियों तक मामला पहुंचाएगा और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
यदि किसी साइट का सेंसर काम करना बंद कर देता है, तो अधिकारियों को इसकी सूचना भी प्राप्त होगी। दिल्ली के करीब 1,800 निर्माण स्थलों में से लगभग 800 स्थलों को 360 डिग्री कैमरों से जोड़ा जा चुका है। इनमें 800 से 900 साइट फिलहाल सक्रिय बताई जा रही हैं। पोर्टल वेब प्लेटफॉर्म के अलावा एंड्रॉयड और iOS मोबाइल एप्लिकेशन के रूप में भी उपलब्ध है, जिससे डीपीसीसी अधिकारी, स्थानीय निकाय और परियोजना संचालक दूर से निगरानी कर सकेंगे।
फील्ड अधिकारियों के लिए QR कोड आधारित साइट एक्सेस, अनुपालन प्रमाणपत्र की स्वचालित व्यवस्था और उल्लंघन की स्थिति में नोटिस या चालान तैयार करने जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। डिजिटल चालान व्यवस्था से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और अनियमितताओं को कम करने का प्रयास किया गया है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि एआई आधारित प्रणाली से नियमों के अनुपालन की रियल-टाइम निगरानी, उल्लंघन पर तत्काल अलर्ट और बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई संभव होगी।
उन्होंने कहा कि दिल्ली का विकास सार्वजनिक स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं होना चाहिए और डस्ट पोर्टल 2.0 पारदर्शिता, जवाबदेही तथा त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पोर्टल के माध्यम से जिला स्तर के डैशबोर्ड, प्रदूषण के रुझानों का विश्लेषण और प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान भी की जा सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि नई डिजिटल व्यवस्था निर्माण स्थलों की निगरानी को अधिक वस्तुनिष्ठ और एकरूप बनाएगी तथा धूल उत्सर्जन को कम करने के लिए डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद करेगी।
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