अध्येता छात्र-छात्रा को व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान खोजने के लिए प्रेरित करता है यह विषय
अधिकाधिक युवाओं को इसे पढ़कर हरित और सतत भविष्य के निर्माण में होना चाहिए भागीदार
एनवायरमेंट पल्स डेस्क
दुनिया में आज हर वर्ग का इंसान पर्यावरण के बारे में न केवल मीडिया में पढ़ रहा है, बल्कि वह हर प्रकार के प्राकृतिक आपदा को करीब से महसूस भी कर रहा है। दुनिया में धरती माँ के बदलते स्वरूप की इन चुनौतियों के बारे में अब सिर्फ जानना काफी नहीं है। इस दौर में ऐसे लोगों की बहुत ज़रूरत है, जो पर्यावरण को समझें और उसके संरक्षण के लिए नए प्रयोग करें। हरित अभियानों से जुड़ें। यही कारण है कि इन दिनों पर्यावरण अध्ययन (Environmental Studies) का चलन तेजी से बढ़ा है।
जब दुनिया भर में लोग जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जैव विविधता के क्षरण, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन पर अपनी बात को बहुत ही बेबाकी से रख रहे हों तो हर युवा यह चाहता है की वह भी इस क्षेत्र में कुछ काम करे। और इसके लिए उसे इस फील्ड की गहरी जानकारी प्राप्त करने के लिए पर्यावरण का अध्ययन करना होगा।
अब सवाल ये है की ऐसा होगा कैसे? इसी लिए आज पर्यावरण अध्ययन (Environmental Studies) केवल एक शैक्षणिक विषय नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। इसमें आगे पढाई करने से युवा न केवल लाभदायक ज्ञान अर्जित करेंगे, बल्कि उनमें समाज और प्रकृति के बारे में और जागरूकता बढ़ेगी।
अगर युवा ढंग से पर्यावरण के बारे में सीखें, तो उससे उन्हें मानव जीवन और प्रकृति से उसके सम्बन्ध के बारे में अच्छी जानकारी मिलती है। स्वच्छ वायु, सुरक्षित जल, उपजाऊ भूमि और समृद्ध जैव-विविधता हमारे अस्तित्व की आधारशिला हैं। एक बार विद्यार्थी अगर पर्यावरण की पढ़ाई पूरी कर ले तो उसे पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास (Sustainable Development), नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अच्छी पकड़ बन जाती है।
आज के समय में जब करियर बनाने के लिए नए-नए रास्ते खुल रहे हैं ( अब डॉक्टर और इंजीनियर बनने के अलावा बहुत कुछ ऐसा है जो हमारे पूर्वजों के समय में नहीं था), पर्यावरण से जुड़े क्षेत्र में भी अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। पर्यावरण वैज्ञानिक, जलवायु विश्लेषक, वन एवं वन्यजीव विशेषज्ञ, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, पर्यावरण सलाहकार, सस्टेनेबिलिटी मैनेजर, कार्बन ऑडिटर और नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञ जैसे अनेक पेशे युवाओं के लिए उपलब्ध हैं। इनमें अच्छा पैसा होने के साथ-साथ सम्मान भी है।
सरकारों, उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को हमेशा काबिल सहयोगियों की तलाश रहती है। पर्यावरण के क्षेत्र में मांग लगातार बढ़ रही है। इसलिए यह विषय रोजगार की दृष्टि से भी अत्यंत संभावनाशील है।
वैज्ञानिक सोच, समस्या समाधान की क्षमता, नेतृत्व कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास इस विषय से काफी हद तक समझ में आता है। यह अध्येता छात्र-छात्रा को व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान खोजने के लिए भी प्रेरित करता है।
ऐसे समय में, जब ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे प्रयोग खूब हो रहे हैं, तो वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक-मुक्ति अभियान और स्वच्छता पर गहरा संवाद और प्रासंगिक बन जाता है। ये प्रयोग विद्यार्थी समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं।
भारत में ऐसे समय में, जब प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव और ज्यादा बढ़ रहा है, शहरीकरण नई चुनौतियाँ उत्पन्न कर रहे हैं, पर्यावरण शिक्षा का महत्व और भी बढ़ जाता है।
पर्यावरण अध्ययन (Environmental Studies) केवल एक विषय नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की कला है। अधिक से अधिक युवाओं को पर्यावरण अध्ययन अपनाकर हरित, सुरक्षित और सतत भविष्य के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। आप पर्यावरण का अध्ययन करके पर्यावरण संरक्षण के काम करेंगे, तो प्रकृति आपको पुण्य देगी। आप एक बड़े पुण्य के भागीदार बनेंगे। क्योंकि आज की तारीख में प्रकृति का संरक्षण करने से बड़ा पुण्य का काम कोई नहीं है। प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी हम और हमारा समाज सुरक्षित रहेगा।
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