भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईओआर), हैदराबाद द्वारा 10 सितंबर 2026 को तिलहन प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण और खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए एक राष्ट्रीय परामर्श एवं उद्योग संवाद बैठक का आयोजन किया जाएगा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य उन्नत तिलहन किस्मों, जैव-उत्पादों और बीज लेपन जैसी तकनीकों को प्रयोगशालाओं से खेतों तक पहुंचाकर उद्योग और अनुसंधान के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। भारत में तिलहन उत्पादन और खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईओआर), हैदराबाद 10 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय परामर्श एवं उद्योग संवाद बैठक आयोजित करेगा।
बैठक का आयोजन आईसीएआर-आईआईओआर परिसर में किया जाएगा। बैठक का विषय “सतत कृषि के लिए किस्मों/संकरों, जैविक उत्पादों और जैव-पॉलिमर-सक्षम बहु-परतीय बीज लेपन प्रौद्योगिकियों में नवाचार : प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण और विस्तार के लिए उद्योग साझेदारी” रखा गया है।
भारत दुनिया की प्रमुख वनस्पति तेल अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश में खाद्य तेल की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए नई कृषि प्रौद्योगिकियों के विकास के साथ उनके व्यावसायीकरण और किसानों तक व्यापक स्तर पर पहुंच को तेज करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी दिशा में आईसीएआर-आईआईओआर ने कई संभावनाशील तकनीकें विकसित की हैं। इनमें उन्नत तिलहन किस्में और संकर, जैव-पॉलिमर आधारित बीज संवर्धन तकनीक तथा सूक्ष्मजीवी जैव-कीटनाशी फॉर्मुलेशन प्रमुख हैं। संस्थान का लक्ष्य इन तकनीकों को अनुसंधान प्रयोगशालाओं से खेतों और बाजार तक तेजी से पहुंचाना है।
राष्ट्रीय परामर्श बैठक में बीज उद्योग, जैव-कीटनाशी एवं जैव-इनपुट कंपनियों, प्रौद्योगिकी लाइसेंसधारकों, कृषि-व्यवसाय कंपनियों, स्टार्टअप और उद्यमिता क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस दौरान आईसीएआर-आईआईओआर अपनी विकसित और संभावनाशील तकनीकों का प्रदर्शन करेगा। बैठक में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, लाइसेंसिंग, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और तकनीकों के बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन से जुड़े अवसरों पर भी चर्चा की जाएगी।
इसके जरिए अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर रहेगा। आईसीएआर-आईआईओआर के अनुसार, इस पहल से नई तिलहन प्रौद्योगिकियों के सत्यापन, व्यावसायीकरण और व्यापक स्तर पर अपनाने की प्रक्रिया को गति मिल सकती है। इसका उद्देश्य किसानों तक उपयोगी तकनीकों की पहुंच बढ़ाने के साथ भारत के तिलहन क्षेत्र के सतत विकास और खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।
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