साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित एक नए व्यापक अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर में 1,07,000 से अधिक पशु, पौधों और कवकों की प्रजातियों का उपयोग या व्यापार किया जाता है, जो जैव विविधता मंच (IPBES) के पहले के 50,000 के अनुमान से दोगुनी से भी अधिक है। इस सूची में 47,685 पशु प्रजातियां (लगभग 31,000 कशेरुकी), 49,723 पौधे और कवक शामिल हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : एक नए व्यापक अध्ययन में सामने आया है कि दुनियाभर में 1,07,000 से अधिक पशु, पौधों और कवकों की प्रजातियों का उपयोग या व्यापार किया जाता है। यह संख्या जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर अंतरसरकारी विज्ञान-नीति मंच (IPBES) के पहले के लगभग 50,000 प्रजातियों के अनुमान से दोगुनी से भी अधिक है।
साइंस एडवांसेज पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन में शेफील्ड विश्वविद्यालय, मेलबर्न विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने कम से कम 1,07,356 प्रजातियों की पहचान की है, जो वैश्विक व्यापार या विभिन्न प्रकार के उपयोग में शामिल हैं। इनमें 47,685 पशु प्रजातियां हैं। लगभग 31,000 प्रजातियां कशेरुकी जीवों की हैं, जो अब तक वर्णित कुल कशेरुकी प्रजातियों का लगभग 42 प्रतिशत है।
इसके अलावा कम से कम 49,723 पौधों की प्रजातियां और विभिन्न प्रकार के कवक भी इस सूची में शामिल हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह संख्या भी वास्तविक आंकड़े से कम हो सकती है, क्योंकि CITES जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समझौतों और मत्स्य क्षेत्र के बाहर निगरानी संबंधी आंकड़ों की भारी कमी है।
वन्यजीव व्यापार का दायरा केवल बाघों और हाथियों की अवैध तस्करी तक सीमित नहीं है। इसमें समुद्री खाद्य पदार्थ, औषधीय पौधे, लकड़ी, पालतू जानवर, सजावटी वस्तुएं और फैशन उत्पाद भी शामिल हैं। अध्ययन के अनुसार, कानूनी वन्यजीव व्यापार का मूल्य अवैध व्यापार से लगभग दस गुना अधिक है। इसके बावजूद मौजूदा अंतरराष्ट्रीय निगरानी प्रणालियां व्यापार में शामिल कुल प्रजातियों में से लगभग दो प्रतिशत को ही दर्ज कर पाती हैं।
इससे अधिकांश प्रजातियों के संरक्षण और उनकी आबादी पर व्यापार के प्रभाव का व्यवस्थित आकलन नहीं हो पाता। शोधकर्ताओं ने बताया कि बहुत कम निगरानी कार्यक्रम यह जानकारी जुटाते हैं कि किसी प्रजाति को जंगल से पकड़ा गया है या कैद में उसका प्रजनन कराया गया है।
इसी तरह, प्रजातियों के दोहन की स्थिरता और उनकी आबादी पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन भी सीमित है। ऑनलाइन विदेशी पालतू जानवरों के व्यापार में तेजी से इस समस्या का दायरा और बढ़ गया है। इस अध्ययन के निष्कर्ष कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा सहित अंतरराष्ट्रीय संरक्षण लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
शोधकर्ताओं का मानना है कि वर्तमान वैश्विक लक्ष्य व्यापार में शामिल प्रजातियों के एक छोटे हिस्से पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। अध्ययन में विभिन्न क्षेत्रों में मानकीकृत और व्यापक आंकड़े जुटाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि वन्यजीव व्यापार से जुड़े जोखिमों का बेहतर आकलन और प्रबंधन किया जा सके। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि निगरानी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वन्यजीव व्यापार और उनके व्यावसायिक उपयोग से जैव विविधता पर पड़ने वाले वास्तविक दबाव का बड़ा हिस्सा संरक्षण प्रयासों की नजर से छूट सकता है।
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