अल नीनो के कारण पनामा में पड़े गंभीर सूखे और जल संकट के चलते पनामा नहर प्राधिकरण ने जहाजों की आवाजाही में भारी कटौती की है। अगस्त में जहाजों की दैनिक संख्या 36 थी, जिसे घटाकर सितंबर में 32 और अक्टूबर से लगभग 29.5 करने का प्रस्ताव है। वर्षा में लगभग 34 प्रतिशत की कमी और जलाशयों में पानी घटने से यह कदम उठाया गया है, जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला और मालभाड़े की लागत पर असर पड़ रहा है। पनामा ने देशव्यापी आपातस्थिति घोषित कर दी है और पानी बचाने के लिए कई उपाय लागू किए हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: अल नीनो के कारण बढ़ते सूखे और जल संकट के बीच पनामा नहर प्राधिकरण ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों की दैनिक संख्या में कटौती शुरू कर दी है। वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अहम पनामा नहर में अगस्त में जहां प्रतिदिन करीब 36 जहाजों को गुजरने की अनुमति थी, वहीं सितंबर की शुरुआत से यह संख्या घटाकर 32 कर दी गई है।
संसद में पेश किए गए एक मसौदा प्रस्ताव के अनुसार अक्टूबर से नहर में प्रतिदिन औसतन करीब 29.5 जहाजों के आवागमन की अनुमति होगी। इनमें नौ स्लॉट Neopanamax जहाजों के लिए निर्धारित होंगे, जबकि शेष स्लॉट Panamax जहाजों को मिलेंगे। पनामा नहर की लॉक प्रणाली के संचालन के लिए Gatun Lake सहित आसपास के जलाशयों पर निर्भरता है।
इन जलाशयों में पानी मुख्य रूप से आसपास के जलग्रहण क्षेत्र में होने वाली बारिश से आता है। मई से अगस्त के बीच बारिश ऐतिहासिक औसत से करीब 34 प्रतिशत कम रही, जबकि जलाशयों में पानी की आवक सामान्य स्तर से लगभग 44 प्रतिशत नीचे दर्ज की गई। अधिकारियों के मुताबिक हाल की बारिश भी अनुमान से कम हुई है।
पनामा नहर से दुनिया के समुद्री व्यापार का लगभग 5 प्रतिशत और अमेरिका के कंटेनर यातायात का करीब 40 प्रतिशत गुजरता है। जहाजों की संख्या सीमित किए जाने से बिना आरक्षित स्लॉट वाले जहाजों के लिए प्रतीक्षा अवधि बढ़ सकती है और पारगमन लागत में इजाफा हो सकता है। पहले से ही नीलामी के जरिए स्लॉट हासिल करने की वजह से कई जहाजों की लागत बढ़ी हुई है।
जल संकट के कारण जहाजों के अधिकतम ड्राफ्ट पर भी असर पड़ रहा है। फिलहाल Neopanamax जहाजों के लिए अधिकतम ड्राफ्ट करीब 14.63 मीटर (48 फीट) है, जिसे परिस्थितियों के आधार पर आगे भी घटाया जा सकता है। इससे कुछ जहाजों को कम माल लेकर गुजरना पड़ सकता है।
पनामा ने अल नीनो के चलते देशव्यापी आपातस्थिति घोषित की है। मौजूदा अल नीनो को रिकॉर्ड के सबसे मजबूत प्रभावों में से एक माना जा रहा है और इसके 2027 तक बने रहने की आशंका जताई गई है। आमतौर पर यह मौसमी घटना मध्य अमेरिका में अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियां पैदा करती है।
जल संकट ने पनामा के लिए चुनौती इसलिए भी बढ़ा दी है क्योंकि नहर को पानी उपलब्ध कराने वाली झीलें देश की बड़ी आबादी के लिए पेयजल का भी महत्वपूर्ण स्रोत हैं। ऐसे में नहर संचालन और आम लोगों की जल जरूरतों के बीच संतुलन बनाना प्राधिकरण के लिए अहम हो गया है।
पनामा नहर प्राधिकरण ने पानी बचाने के लिए कई उपाय लागू किए हैं और कहा है कि आने वाले महीनों में बारिश की स्थिति के आधार पर संचालन में आगे बदलाव किए जा सकते हैं। खासकर आगामी शुष्क मौसम को देखते हुए जल प्रबंधन पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। वैश्विक स्तर पर अन्य समुद्री मार्गों में जारी व्यवधानों के कारण पनामा नहर पर बढ़ी मांग के बीच यह जल संकट अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला के लिए एक और चुनौती बन गया है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए नहर का संचालन सुरक्षित तरीके से जारी रखा जाएगा।
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