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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जल > जलवायु परिवर्तन की मार: दुनिया की सबसे बड़ी पेंगुइन कॉलोनी में 63% की गिरावट
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जलवायु परिवर्तन की मार: दुनिया की सबसे बड़ी पेंगुइन कॉलोनी में 63% की गिरावट

Environment Pulse
Last updated: October 11, 2026 7:29 pm
Environment Pulse
Published: October 11, 2026
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अंटार्कटिका के जावोडोव्स्की द्वीप पर जलवायु परिवर्तन और समुद्र का तापमान बढ़ने के कारण दुनिया की सबसे बड़ी चिनस्ट्रैप पेंगुइन कॉलोनी में 15 वर्षों में 63% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। मुख्य भोजन ‘क्रिल’ के दक्षिण की ओर खिसकने के कारण पांच लाख से अधिक पेंगुइन कम हो गए हैं, जिससे वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति के संरक्षण की स्थिति की फिर से समीक्षा करने की मांग की है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क :  अंटार्कटिका के पास जावोडोव्स्की द्वीप पर 15 वर्षों में आधे मिलियन से अधिक पेंगुइन हुए कम, समुद्र के बढ़ते तापमान से संकट अंटार्कटिका के निकट स्थित दुनिया की सबसे बड़ी पेंगुइन कॉलोनी में जलवायु परिवर्तन के कारण भारी गिरावट दर्ज की गई है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण सैंडविच द्वीप समूह के निर्जन जावोडोव्स्की द्वीप पर चिनस्ट्रैप पेंगुइन के घोंसलों की संख्या 2011 से 2025 के बीच 63 प्रतिशत घट गई। इस गिरावट के कारण पांच लाख से अधिक पक्षियों के बराबर आबादी का नुकसान हुआ है। करंट बायोलॉजी पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, 2011 में इस द्वीप पर लगभग छह लाख चिनस्ट्रैप पेंगुइन मौजूद थे।

ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के शोधकर्ताओं ने ड्रोन सर्वेक्षण, मैदानी गणना और उपग्रह तस्वीरों के जरिए आबादी में आए बदलाव का आकलन किया। यह किसी एक स्थान पर चिनस्ट्रैप पेंगुइन की आबादी में दर्ज सबसे बड़ी गिरावट बताई गई है।

शोधकर्ताओं ने इस संकट के लिए मुख्य रूप से दक्षिणी महासागर में जलवायु परिवर्तन से हो रहे बदलावों को जिम्मेदार माना है। द्वीप पर स्थित सक्रिय ज्वालामुखी माउंट करी में 2016 में विस्फोट हुआ था, लेकिन पेंगुइन की आबादी में गिरावट इससे पहले ही शुरू हो गई थी और बाद में भी जारी रही।

चिनस्ट्रैप पेंगुइन का प्रमुख भोजन अंटार्कटिक क्रिल नामक छोटे समुद्री जीव हैं। समुद्र का तापमान बढ़ने से क्रिल दक्षिण की ओर वेडेल सागर की तरफ खिसक रहे हैं। समुद्री बर्फ की बाधाओं और उपयुक्त प्रजनन स्थलों की कमी के कारण पेंगुइन के लिए भोजन के पीछे जाना मुश्किल हो रहा है। इसके विपरीत, इसी द्वीप पर पाए जाने वाले मैकरोनी पेंगुइन की आबादी स्थिर रही है या उसमें मामूली वृद्धि हुई है।

इसका एक संभावित कारण उनका अपेक्षाकृत विविध आहार है, जिसमें मछलियां और अन्य छोटे समुद्री जीव भी शामिल हैं। ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर नॉर्मन रैटक्लिफ ने इस गिरावट को चिंताजनक बताया है। जावोडोव्स्की द्वीप अब दुनिया की सबसे बड़ी पेंगुइन कॉलोनी का दर्जा खो चुका है। यह स्थान अंटार्कटिका के रॉस सागर क्षेत्र में स्थित केप अडारे ने ले लिया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन निष्कर्षों के आधार पर चिनस्ट्रैप पेंगुइन की वैश्विक संरक्षण स्थिति की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए।

फिलहाल इसे ‘लीस्ट कंसर्न’ यानी अपेक्षाकृत कम जोखिम वाली श्रेणी में रखा जाता है। शोधकर्ता इसे अधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखने पर विचार करने की जरूरत जता रहे हैं। यह अध्ययन संकेत देता है कि अंटार्कटिका जैसे दूरस्थ और अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्रों के पारिस्थितिकी तंत्र भी तेजी से बदलती जलवायु से अछूते नहीं हैं।

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