संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP31) की मेजबानी की तैयारियों के तहत तुर्किये ने जलवायु प्रतिबद्धताओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए ‘क्लाइमेट इम्प्लीमेंटेशन ब्रिज’ (सीआईबी) पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य जलवायु योजनाओं और वित्तीय संसाधनों के बीच की खाई को पाटना है। यूएनडीपी के सहयोग से शुरू की गई इस पहल के पायलट देशों में इथियोपिया, फिजी, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं, जहाँ निवेश योग्य परियोजनाएं तैयार कर उन्हें निवेशकों से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, तुर्किये ने ‘अंताल्या प्लेज ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के जरिए अधिक बिजली खपत करने वाले एआई डेटा सेंटरों को जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप बनाने, ऊर्जा खपत में पारदर्शिता बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर जोर दिया है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क : संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP31) की मेजबानी की तैयारियों के बीच तुर्किये ने जलवायु संबंधी राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए ‘क्लाइमेट इम्प्लीमेंटेशन ब्रिज’ पहल शुरू की है।
इसके साथ ही देश ने ऊर्जा की खपत करने वाले एआई डेटा सेंटरों के लिए पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जुड़ी एक स्वैच्छिक प्रतिबद्धता को भी आगे बढ़ाया है। ‘क्लाइमेट इम्प्लीमेंटेशन ब्रिज’ (सीआईबी) का उद्देश्य देशों की जलवायु योजनाओं, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) और अनुकूलन रणनीतियों को लागू करने के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों के बीच की खाई को पाटना है।
इस पहल के तहत ऐसी परियोजनाएं तैयार की जाएंगी, जिनमें निवेश की स्पष्ट संभावनाएं हों। इसके बाद उन्हें सरकारी और निजी निवेशकों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) सहित विभिन्न भागीदारों के सहयोग से संचालित इस पहल के पायलट देशों में इथियोपिया, फिजी, इंडोनेशिया, पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं।
इसके समानांतर, तुर्किये ‘अंताल्या प्लेज ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को बढ़ावा दे रहा है। इस स्वैच्छिक राजनीतिक प्रतिबद्धता का उद्देश्य एआई के तेजी से बढ़ते बुनियादी ढांचे, विशेषकर अधिक बिजली खपत करने वाले डेटा सेंटरों को जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप बनाना है। इसके तहत ऊर्जा खपत में पारदर्शिता बढ़ाने और एआई संचालन के लिए स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर जोर दिया गया है।
तुर्किये के अधिकारियों ने COP31 को ‘इम्प्लीमेंटेशन कॉप’ यानी क्रियान्वयन पर केंद्रित सम्मेलन के रूप में प्रस्तुत किया है। इन पहलों को देश के एक्शन एजेंडे का प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य जलवायु प्रतिबद्धताओं को धरातल पर उतारना और तकनीकी विकास को पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ाना है।

