शिमला नगर निगम द्वारा संकरी सड़कों पर 12 बैटरी चालित कचरा संग्रहण वैन चलाई जा रही हैं (प्रत्येक की क्षमता ~1 टन और रेंज ~130-150 किमी), जिनकी सर्दियों में दक्षता की जांच की जाएगी।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। हिमाचल प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने की मुहिम अब सार्वजनिक बसों से आगे बढ़ रही है। राज्य में इलेक्ट्रिक कचरा संग्रहण वैन और ई-टैक्सियों का प्रयोग शुरू किया गया है।
पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इस पहल का उद्देश्य प्रदूषण कम करने के साथ स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना है।
शिमला नगर निगम शहर की संकरी और खड़ी सड़कों पर फिलहाल 12 बैटरी चालित कचरा संग्रहण वैन संचालित कर रहा है। यह पहल सितंबर 2025 में पायलट परियोजना के रूप में दो इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ शुरू हुई थी।
इसके लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड और ICLEI South Asia से सहयोग मिला था। अप्रैल 2026 से इन वाहनों का संचालन पूरी तरह शुरू हो गया और बाद में राज्य परिवहन विभाग तथा नगर निगम ने मिलकर बेड़े के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई। शिमला में प्रतिदिन करीब 90 टन घरेलू कचरा निकलता है।
इसके संग्रहण के लिए लगभग 60 डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों का मिश्रित बेड़ा इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक इलेक्ट्रिक कचरा वैन की वास्तविक क्षमता का परीक्षण सर्दियों में होगा, जब बर्फबारी, कम तापमान और खड़ी ढलानों के कारण बैटरी की दक्षता और वाहन की रेंज प्रभावित हो सकती है।
प्रत्येक इलेक्ट्रिक वैन की कचरा ढोने की क्षमता करीब एक टन है और पूरी तरह चार्ज होने पर यह लगभग 130 से 150 किलोमीटर तक चल सकती है। इन वाहनों के लिए आवश्यक चार्जिंग बुनियादी ढांचा भी तैयार किया जा चुका है।
कचरा संग्रहण वाहनों के साथ राज्य सरकार ई-टैक्सी योजना के माध्यम से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को रोजगार से जोड़ने पर भी जोर दे रही है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को इलेक्ट्रिक टैक्सी खरीदने के लिए सब्सिडी और सहायता दी जाती है। इसके बाद इन टैक्सियों को सरकारी विभागों से जोड़ा जाता है, जिससे वाहन मालिक स्वयं चालक के रूप में काम करके आय अर्जित कर सकते हैं।
फिलहाल राज्य में ऐसी 96 ई-टैक्सियां संचालित हो रही हैं और इनके माध्यम से 96 लोगों को आजीविका का अवसर मिला है। सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रिक परिवहन को केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से भी जोड़ना है। हिमाचल प्रदेश की व्यापक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी रणनीति में इलेक्ट्रिक बसों को भी प्रमुख स्थान दिया गया है।
राज्य में पहले से ही बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों को परिवहन व्यवस्था में शामिल किया जा चुका है। इसके अलावा कम सेवा वाले मार्गों पर करीब 1,000 निजी स्वामित्व वाली इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने की योजना पर भी काम चल रहा है। हालांकि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के बड़े पैमाने पर विस्तार के सामने कई चुनौतियां भी हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में चार्जिंग बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, अत्यधिक ठंड और बर्फबारी में वाहनों की विश्वसनीयता, बैटरी रेंज तथा परिचालन लागत जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देना होगा। मौजूदा पायलट परियोजनाओं से प्राप्त अनुभव भविष्य की नीतियों और विस्तार योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध कराएगा। अधिकारियों के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार हिमाचल प्रदेश को प्रदूषण कम करने, परिचालन खर्च घटाने और हरित राज्य के रूप में विकसित करने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।
पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र की संवेदनशीलता और पर्यटन पर राज्य की मजबूत निर्भरता को देखते हुए स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पायलट परियोजनाओं की लगातार निगरानी के आधार पर आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कचरा वाहनों, ई-टैक्सियों और अन्य इलेक्ट्रिक परिवहन साधनों का विस्तार किया जा सकता है।
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