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Environment Pulse > ईको सिस्टम > जैव-विविधता > मॉस्को राउंडटेबल में भारत ने हिम तेंदुआ संरक्षण की वैज्ञानिक उपलब्धियों को किया साझा
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मॉस्को राउंडटेबल में भारत ने हिम तेंदुआ संरक्षण की वैज्ञानिक उपलब्धियों को किया साझा

Environment Pulse
Last updated: August 28, 2026 9:25 pm
Environment Pulse
Published: August 28, 2026
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मॉस्को में आयोजित रूसी-भारतीय राउंडटेबल बैठक में भारत ने हिम तेंदुआ संरक्षण के क्षेत्र में अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों, रेडियो टेलीमेट्री, आनुवंशिक विश्लेषण और आबादी के आकलन से जुड़े कार्यों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साझा किया। यह बैठक दिसंबर 2025 में ‘इरबिस’ और इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के बीच हुए समझौते के तहत दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग और अनुसंधान को मजबूत करने के लिए आयोजित की गई थी।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। भारत ने हिम तेंदुआ संरक्षण के क्षेत्र में विज्ञान आधारित पहलों और तकनीकी प्रगति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रेखांकित किया।

रूस के मॉस्को स्थित ए.एन. सेवर्ट्सोव इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में आयोजित रूसी-भारतीय राउंडटेबल मीटिंग ऑन स्नो लेपर्ड स्टडी एंड कंजर्वेशन में भारत ने हिम तेंदुओं की आबादी के आकलन, रेडियो टेलीमेट्री और आनुवंशिक विश्लेषण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की।

यह बैठक इंटररीजनल एसोसिएशन ‘इरबिस’ और इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के बीच दिसंबर 2025 में हुए साझेदारी समझौते के तहत आयोजित की गई। इस साझेदारी का उद्देश्य हिम तेंदुओं के वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।

बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हिम तेंदुआ संरक्षण के क्षेत्र में देश की प्रगति और विज्ञान आधारित संरक्षण रणनीतियों को प्रस्तुत किया। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के विशेषज्ञों ने हिम तेंदुओं की आबादी के वैज्ञानिक आकलन, रेडियो टेलीमेट्री के जरिए उनकी गतिविधियों की निगरानी और आनुवंशिक विश्लेषण से जुड़ी प्रगति पर विस्तार से जानकारी दी।

विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल हिम तेंदुओं की संख्या, उनके आवास, व्यवहार और आबादी की आनुवंशिक स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर रहा है।

इससे संरक्षण की रणनीतियों को अधिक प्रभावी और साक्ष्य आधारित बनाने में सहायता मिलती है। राउंडटेबल में रूस के प्राकृतिक संसाधन एवं पर्यावरण मंत्रालय, ए.एन. सेवर्ट्सोव इंस्टीट्यूट ऑफ इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन, मॉस्को जू, रोस्प्रिरोडनाडजोर तथा हिम तेंदुआ अनुसंधान और संरक्षण से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। बैठक के दौरान हिम तेंदुआ संरक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन, निगरानी और अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने पर विषयगत चर्चा हुई।

भारत और रूस के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और ज्ञान साझा किए तथा प्रजाति के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए साझा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया। भारत की भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि हिम तेंदुआ संरक्षण अब केवल वन्यजीव सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक वैज्ञानिक निगरानी, डेटा विश्लेषण, रेडियो टेलीमेट्री और आनुवंशिक अध्ययन जैसे उपकरण इसकी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

मॉस्को में हुई यह बैठक भारत और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच हिम तेंदुआ संरक्षण के लिए वैज्ञानिक सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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