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Reading: दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण की आर्थिक कीमत GDP के 10% के बराबर: UNEP Report
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Environment Pulse > ईको सिस्टम > हवा > दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण की आर्थिक कीमत GDP के 10% के बराबर: UNEP Report
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हवा

दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण की आर्थिक कीमत GDP के 10% के बराबर: UNEP Report

Environment Pulse
Last updated: September 10, 2026 3:13 pm
Environment Pulse
Published: September 10, 2026
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संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और Climate and Clean Air Coalition की नई रिपोर्ट (‘Hidden Assets’) के अनुसार, दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण का आर्थिक बोझ क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 10 प्रतिशत के बराबर है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु और स्वच्छ हवा से जुड़े 25 एकीकृत उपायों पर किए जाने वाले प्रत्येक 1 डॉलर के निवेश पर करीब 21 डॉलर का आर्थिक लाभ मिल सकता है। इन उपायों को लागू करके 2035 तक GDP के लगभग 4 प्रतिशत के नुकसान से बचा जा सकता है। इसके अलावा, स्वच्छ खाना पकाने, बिजली उत्पादन में ऊर्जा परिवर्तन और कड़े औद्योगिक उत्सर्जन मानकों को अपनाकर स्वास्थ्य नुकसान और समयपूर्व मौतों को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।

एनवायरमेंट पल्स डेस्क। दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण का आर्थिक बोझ दुनिया के किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में सबसे अधिक है और यह क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के करीब 10 प्रतिशत के बराबर है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और Climate and Clean Air Coalition के नए विश्लेषण में यह बात सामने आई है।

‘Hidden Assets: The Economic and Health Case for Climate and Clean Air Action’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान, उत्पादकता में कमी और अन्य आर्थिक क्षतियों का बोझ दक्षिण एशिया पर सबसे अधिक पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में जलवायु और स्वच्छ हवा से जुड़े 25 एकीकृत उपायों को लागू करने पर प्रत्येक 1 डॉलर के निवेश के बदले करीब 21 डॉलर का आर्थिक लाभ मिल सकता है। 15 क्षेत्रों के अध्ययन में यह सबसे अधिक निवेश प्रतिफल है।

रिपोर्ट के मुताबिक इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर 2035 तक दक्षिण एशिया के GDP के लगभग 4 प्रतिशत के बराबर नुकसान से बचा जा सकता है। यह लाभ 2100 तक बढ़कर GDP के करीब 14.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। केवल स्वच्छ हवा और अल्पकालिक जलवायु उपायों से ही 2035 तक क्षेत्रीय GDP के 3 प्रतिशत से अधिक के बराबर लाभ मिलने का अनुमान है। दक्षिण एशिया के लिए 2035 तक सबसे महत्वपूर्ण उपाय के रूप में स्वच्छ खाना पकाने और हीटिंग को चिन्हित किया गया है।

इसके बाद बिजली उत्पादन में ऊर्जा परिवर्तन और औद्योगिक प्रक्रियाओं से होने वाले उत्सर्जन के लिए कड़े मानकों को प्राथमिकता दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वच्छ खाना पकाने के साधनों को बढ़ावा देने से घरेलू वायु प्रदूषण कम करने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी खर्च और समय से पहले होने वाली मौतों को भी घटाया जा सकता है।

दुनिया के स्तर पर इन 25 उपायों पर प्रत्येक 1 डॉलर के निवेश से लगभग 15 डॉलर का आर्थिक लाभ मिलने का अनुमान है। इन उपायों से 2035 में वैश्विक GDP के 2.8 प्रतिशत, 2050 में 4.5 प्रतिशत और 2100 तक 11.4 प्रतिशत के बराबर आर्थिक लाभ हासिल किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में मानव गतिविधियों से उत्पन्न बाहरी वायु प्रदूषण दुनिया भर में अनुमानित 64 लाख समयपूर्व मौतों से जुड़ा था। इसके अतिरिक्त घरेलू वायु प्रदूषण के कारण करीब 20 लाख मौतें हुईं, जिनमें लगभग 3 लाख बच्चे शामिल थे।

दक्षिण एशिया दुनिया के सबसे गंभीर वायु गुणवत्ता संकट वाले क्षेत्रों में शामिल है। इंडो-गैंगेटिक मैदान विशेष रूप से प्रदूषण के उच्च स्तर से प्रभावित हैं। क्षेत्र की बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ता शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियां, परिवहन उत्सर्जन और घरेलू ईंधन का इस्तेमाल वायु प्रदूषण की चुनौती को और गंभीर बनाते हैं।

UNEP अधिकारियों के अनुसार, वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से एक साथ निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई उपलब्ध सबसे अधिक लाभ देने वाले सार्वजनिक निवेशों में से एक हो सकती है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि कार्रवाई में देरी से हर साल वैश्विक स्तर पर 1.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक संभावित लाभ गंवाया जा रहा है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष दक्षिण एशिया में स्वच्छ खाना पकाने के कार्यक्रमों के विस्तार, स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों को बढ़ावा देने और उत्सर्जन मानकों को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

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