मलेशिया में वैज्ञानिक संकटग्रस्त ‘सफेद हाथ वाले गिब्बन’ (प्राइमेट्स) के मधुर गीतों का अध्ययन कर रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि सड़क यातायात और मानवजनित शोर उनकी सुबह की पुकारों को कैसे प्रभावित कर रहा है। शोध से पता चला है कि व्यस्त राजमार्गों के पास रहने वाले गिब्बन कम आवाज निकालते हैं, जिससे उनके सामाजिक संवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ता है। IUCN द्वारा इन्हें संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। वैज्ञानिक इनकी आबादी के आकलन के लिए बायोअकॉस्टिक्स (जैव-ध्वनि विज्ञान) तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: मलेशिया में वैज्ञानिक संकटग्रस्त सफेद हाथ वाले गिब्बन के जटिल और मधुर गीतों का अध्ययन कर रहे हैं। शोध का उद्देश्य यह समझना है कि सड़क यातायात और मानव गतिविधियों से पैदा होने वाला शोर इन प्राइमेट्स की सुबह की सामूहिक पुकार को किस तरह प्रभावित कर रहा है और इसका उनके अस्तित्व पर क्या असर पड़ सकता है।
सफेद हाथ वाला गिब्बन (Hylobates lar) अपनी तेज, मधुर और शुद्ध स्वर वाली आवाज के लिए जाना जाता है। इसकी पुकार घने वर्षावनों की छतरी के बीच आधे मील से अधिक दूरी तक सुनी जा सकती है। कई बार नर और मादा गिब्बन मिलकर समन्वित युगल गीत गाते हैं।
ये गीत क्षेत्र की रक्षा, जोड़ी के बीच संबंध मजबूत करने और जंगल में दूर-दूर तक संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके ऊंचे और नियंत्रित स्वरों के कारण वैज्ञानिक इन्हें अक्सर जंगल का ‘सोप्रानो’ कहते हैं।
Universiti Sains Malaysia के अंतिम वर्ष के पीएचडी शोधार्थी बेंजामिन गेलिया के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में यातायात और अन्य मानवजनित शोर के प्रभावों का विश्लेषण किया गया। 2023 और 2024 के दौरान तीन अलग-अलग स्थानों पर गिब्बन के सुबह के गीत रिकॉर्ड किए गए।
इनमें एक व्यस्त राजमार्ग के पास, दूसरा लोकप्रिय हाइकिंग ट्रेल के किनारे और तीसरा अपेक्षाकृत शांत समुद्र तटीय क्षेत्र था। अभी तक सहकर्मी समीक्षा से नहीं गुजड़े अध्ययन के परिणामों में शोर और गिब्बन के गायन के बीच स्पष्ट संबंध सामने आया। राजमार्ग के सबसे करीब रहने वाले मम्बांग और वालिनोंग समूह ने केवल 36 प्रतिशत रिकॉर्डिंग में आवाज निकाली।
इसके मुकाबले हाइकिंग ट्रेल वाले समूह ने 84.6 प्रतिशत और समुद्र तट के शांत इलाके वाले समूह ने 71.4 प्रतिशत रिकॉर्डिंग में गीत गाए। एक ही स्थान पर भी पृष्ठभूमि का शोर बढ़ने के साथ गिब्बन के आवाज निकालने की संभावना कम होती गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, गिब्बन के गीत केवल जंगल की पृष्ठभूमि में सुनाई देने वाली आवाज नहीं हैं।
इनमें संवाद, क्षेत्रीय सीमाओं की रक्षा और सामाजिक संबंध बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण कार्य जुड़े हैं। ऐसे में लगातार बढ़ता सड़क, आवासीय और विकास संबंधी शोर इन गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने सफेद हाथ वाले गिब्बन को संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है। पिछले 45 वर्षों में इसकी आबादी में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट का अनुमान है। आवासों का विनाश, शिकार और पालतू जानवरों के अवैध व्यापार के लिए पकड़ना इसकी संख्या घटने के प्रमुख कारण हैं। मलेशिया में जैव-ध्वनि विज्ञान यानी बायोअकॉस्टिक्स पर शोध भी तेजी से बढ़ रहा है।
वैज्ञानिक अब स्वचालित रिकॉर्डरों के जरिए सुबह के जंगलों में होने वाली गिब्बन की पुकार रिकॉर्ड कर उनकी आबादी और महत्वपूर्ण आवासों का गैर-हस्तक्षेपकारी तरीके से आकलन कर रहे हैं। यह तकनीक उन गिब्बनों का भी पता लगाने में मदद करती है जो घने जंगल की ऊंची छतरी में छिपे रहते हैं।
मलेशिया के जंगलों पर विकास का दबाव लगातार बढ़ने के बीच वैज्ञानिकों का मानना है कि इन ‘वन सोप्रानो’ की ध्वनि-परिस्थितिकी को समझना इनके संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
जंगलों में शोर को नियंत्रित करना और संवेदनशील आवासों की बेहतर सुरक्षा इन अनोखे और संकटग्रस्त प्राइमेट्स के भविष्य के लिए अहम साबित हो सकती है।

