असम सरकार ने बढ़ते तापमान और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों से निपटने के लिए विश्व ओजोन दिवस 2026 के अवसर पर ‘असम कूलिंग एक्शन प्लान (ACAP)’ लॉन्च किया है। ACCMS और WRI India द्वारा तैयार इस योजना के तहत भवन, कोल्ड चेन, उद्योग और परिवहन को प्राथमिकता दी गई है, क्योंकि 2040 तक राज्य में कूलिंग से संबंधित बिजली की मांग 3,576 GWh से बढ़कर 8,445 GWh होने और औसत अधिकतम तापमान में 0.85 से 1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने का अनुमान है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा-दक्ष कूलिंग प्रणालियों को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हरित आवरण को बढ़ाना है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: असम सरकार ने बढ़ते तापमान और भविष्य में बढ़ने वाली कूलिंग संबंधी बिजली मांग से निपटने के लिए असम कूलिंग एक्शन प्लान (ACAP) लॉन्च किया है।
विश्व ओजोन दिवस 2026 के अवसर पर शुरू किए गए इस प्लान में भवन, कोल्ड चेन, उद्योग और परिवहन को चार प्राथमिक क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है।
असम क्लाइमेट चेंज मैनेजमेंट सोसाइटी (ACCMS) ने WRI India के तकनीकी सहयोग से यह योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य ऊर्जा दक्ष कूलिंग सिस्टम को बढ़ावा देना, रेफ्रिजरेंट के जिम्मेदार प्रबंधन, पर्यावरण अनुकूल कूलिंग तकनीकों को अपनाने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
योजना के अनुसार, असम में कूलिंग से संबंधित बिजली की मांग 2040 तक 3,576 GWh से बढ़कर 8,445 GWh हो सकती है। वहीं, 1981-2010 की आधार अवधि की तुलना में 2040 तक राज्य का औसत अधिकतम तापमान 0.85 से 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ने का अनुमान है।
वन मंत्री जयंत मल्लबरुआ ने कहा कि बढ़ती कूलिंग जरूरतों को पूरा करने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने तकनीकी उपायों के साथ हरित आवरण बढ़ाने और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर जोर दिया।
योजना के मुताबिक 2025 में राज्य में रेफ्रिजरेटर की पहुंच करीब 20 प्रतिशत थी, जो 2040 तक 49 प्रतिशत होने का अनुमान है। एयर कंडीशनर की पहुंच 2025 के 2 प्रतिशत से बढ़कर 2040 तक कुल 8 प्रतिशत हो सकती है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 38 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। आवासीय भवनों में बिजली की खपत भी 2025 के 2,446 GWh से बढ़कर 2040 में करीब 5,522 GWh होने का अनुमान है।
औद्योगिक क्षेत्र में कूलिंग ऊर्जा की मांग सबसे तेज गति से बढ़ने की संभावना है, जबकि भवन क्षेत्र कुल मांग में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बनाए रख सकता है। मल्लबरुआ ने अमृत बृक्ष आंदोलन और वृक्ष बंधु जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जलवायु कार्रवाई केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं रह सकती।
उन्होंने युवाओं और आम नागरिकों से ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल उपाय अपनाने तथा वृक्षारोपण और संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

