जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में पर्यावरण संरक्षण और कचरे के रचनात्मक उपयोग की अनूठी मिसाल पेश करते हुए शहर का पहला ‘वेस्ट-टू-वंडर’ गार्डन बनाया गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 21 अगस्त को पोलो व्यू के पास इस थीम आधारित पुष्प उद्यान का उद्घाटन किया।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मक पुन: उपयोग की अनूठी मिसाल सामने आई है। शहर में पहली बार ‘वेस्ट-टू-वंडर’ गार्डन तैयार किया गया है, जहां पुराने और अनुपयोगी वाहनों सहित कबाड़ में पड़े सामान को आकर्षक फूलों की सजावट और प्लांटर में बदल दिया गया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 21 अगस्त को शहर के केंद्र में पोलो व्यू के पास फ्लोरीकल्चर पार्क में इस थीम आधारित पुष्प उद्यान का उद्घाटन किया।
कश्मीर के फ्लोरीकल्चर विभाग द्वारा विकसित इस गार्डन का उद्देश्य यह दिखाना है कि बेकार और त्यागी गई वस्तुओं को रचनात्मक सोच, पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के जरिए खूबसूरत सार्वजनिक स्थानों का हिस्सा बनाया जा सकता है।
यहां पुराने वाहनों और अन्य वस्तुओं को फूलों के प्लांटर तथा सजावटी इंस्टॉलेशन के रूप में इस्तेमाल किया गया है। गार्डन के प्रमुख आकर्षणों में 1970 के दशक का एचएमटी निर्मित ट्रैक्टर, जम्मू-कश्मीर गैरेज विभाग की पुरानी जीप, विंटेज एंबेसडर कार, पारंपरिक कश्मीरी टांगा, फूलों से सजी नाव और स्कूटर शामिल हैं। पुराने टायर और अन्य पुन: उपयोग की गई वस्तुओं को भी सजावटी ढांचे और प्लांटर में तब्दील किया गया है।
गार्डन की एक खास बात यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली करीब 90 प्रतिशत सामग्री को रिसाइक्लिंग और रिफर्बिशमेंट के जरिए जुटाया गया है। कई वस्तुएं लोगों और विभागों की ओर से दान की गई हैं। फ्लोरीकल्चर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन इंस्टॉलेशन के लिए किसी नई वस्तु की खरीद नहीं की गई है।
इस पहल का मूल उद्देश्य रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल (RRR) के सिद्धांत को बढ़ावा देना है। गार्डन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए इसकी प्रकाश व्यवस्था में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया गया है। इससे इसे लगभग शून्य-कार्बन उत्सर्जन वाला मनोरंजक स्थल बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है। सौर ऊर्जा आधारित रोशनी इस परियोजना के टिकाऊ स्वरूप को और मजबूत करती है।
फ्लोरीकल्चर, कश्मीर की निदेशक माथूरा मासूम ने बताया कि विभाग ने पुराने और परित्यक्त वाहनों, लकड़ी के पुराने टिकट पोस्ट और टांगों जैसी वस्तुओं को रचनात्मक इंस्टॉलेशन में बदलने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि गार्डन में लगाए गए सभी इंस्टॉलेशन दान में मिले हैं और इनके लिए कोई खरीद नहीं की गई। यह गार्डन ऑल-सीजन आकर्षण के रूप में विकसित किया गया है।
पौधों का चयन और अलग-अलग समय पर फूल आने की व्यवस्था इस तरह की गई है कि वसंत से लेकर देर शरद ऋतु तक यहां लगातार फूल खिले रहें। इससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी पूरे मौसम में आकर्षित करने की उम्मीद है। गार्डन में ‘टेक ए प्लांट एंड मेक ए प्रॉमिस’ पहल भी शुरू की गई है। इसके तहत स्थानीय लोगों को सक्युलेंट और कैलेडियम जैसे पौधे मुफ्त दिए जाते हैं। पौधा लेने वाले लोगों से घर पर उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की जाती है।
इस पहल के जरिए सार्वजनिक उद्यान से आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण को लोगों के घरों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। पोलो व्यू के आसपास का यह क्षेत्र शहर के व्यस्त इलाकों में शामिल है। पास के बारबर शाह और मैसूमा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लोगों के लिए यह गार्डन एक नया हरित और मनोरंजक स्थल उपलब्ध कराता है। साथ ही, इसे श्रीनगर में पर्यावरण जागरूकता, रचनात्मक कचरा प्रबंधन और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने वाले संभावित पर्यटन आकर्षण के रूप में भी देखा जा रहा है।
‘वेस्ट-टू-वंडर’ गार्डन इस संदेश को मजबूत करता है कि हर अनुपयोगी वस्तु कचरा नहीं होती। रचनात्मक सोच और पुन: उपयोग के जरिए पुराने सामान को नया उद्देश्य देकर शहरों में हरित स्थान तैयार किए जा सकते हैं और साथ ही कचरे का बोझ भी कम किया जा सकता है। यह पहल नागालैंड के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों और नवीकरणीय ऊर्जा खपत संबंधी दायित्वों को पूरा करने में भी योगदान देगी। साथ ही, पूर्वोत्तर भारत में सौर ऊर्जा के विस्तार और निजी निवेश के लिए नए अवसर खोल सकती है। बढ़ती बिजली मांग और ऊर्जा घाटे से निपटने के बीच नागालैंड का यह कदम स्थानीय स्तर पर स्वच्छ बिजली उत्पादन और दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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