By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Environment PulseEnvironment PulseEnvironment Pulse
Notification Show More
Font ResizerAa
  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • कचरा-प्रबंधन
  • सस्टेनिबिलिटी
  • विचार
  • वीडियो
Reading: एआई-आधारित पूर्वानुमान प्रणाली का बड़ा संकेत, फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो
Share
Font ResizerAa
Environment PulseEnvironment Pulse
  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • कचरा-प्रबंधन
  • सस्टेनिबिलिटी
  • विचार
  • वीडियो
Search
  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • कचरा-प्रबंधन
  • सस्टेनिबिलिटी
  • विचार
  • वीडियो
Have an existing account? Sign In
Follow US
Environment Pulse > जल > एआई-आधारित पूर्वानुमान प्रणाली का बड़ा संकेत, फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो
(फोटो सौजन्य-एआई)
जलसस्टेनिबिलिटीस्टोरीहवा

एआई-आधारित पूर्वानुमान प्रणाली का बड़ा संकेत, फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो

Environment Pulse
Last updated: August 6, 2026 9:32 pm
Environment Pulse
Published: August 6, 2026
Share
(फोटो सौजन्य-एआई)
SHARE

इनकॉइस (INCOIS) की AI और मशीन लर्निंग आधारित प्रणाली व ग्लोबल ओसियन डेटा अध्ययन पर आधारित है अनुमान

Contents
AI और मशीन लर्निंग आधारित गहरा अध्ययनक्या देश में कमजोर होगा मानसून?इनकॉइस का हाई-रिज़ॉल्यूशन नेटवर्क और एडवांस अलर्ट

अल नीनो से समुद्री हीटवेव, तापमान वृद्धि, मछलियों के वितरण और तटीय कारोबार पर असर पड़ने की आशंका

एनवायरमेंट पल्स डेस्क

देश में इस साल बारिश की चर्चा के साथ-साथ अल नीनो (El Niño) को लेकर भी व्यापक बहस जारी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) की ताज़ा रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि मई 2026 में जो अल नीनो की स्थिति मजबूत हुई थी, वह अगले साल फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है।

AI और मशीन लर्निंग आधारित गहरा अध्ययन

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कोई सामान्य अंदेशा नहीं है, बल्कि इसके बने रहने की संभावना 70 से 90 प्रतिशत तक है। यह अनुमान इनकॉइस की अत्याधुनिक AI और मशीन लर्निंग (Machine Learning) आधारित पूर्वानुमान व्यवस्था तथा ग्लोबल ओसियन डेटा पर आधारित गहरे शोध के बाद जारी किया गया है।

क्या देश में कमजोर होगा मानसून?

मानसून पर इसके प्रभाव को लेकर डॉ. सिंह ने बताया कि यूँ तो अल नीनो का सीधा संबंध कमजोर बारिश से माना जाता रहा है, लेकिन भारतीय मानसून की तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। भारतीय मानसून का मिज़ाज कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole – IOD) और मैडेन-जूलियन दोलन (Madden-Julian Oscillation – MJO) शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि अल नीनो के बने रहने की बात के बावजूद असली असर इस बात से तय होगा कि सीज़न के समय समुद्र और वायुमंडल के बीच कैसा तालमेल रहता है।

समुद्री हीटवेव और इकोसिस्टम के लिए चेतावनी

डॉ. सिंह ने चेताया है कि अल नीनो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में वायुमंडलीय उथल-पुथल बढ़ा सकता है, जिससे तापमान में बढ़ोतरी होगी और समुद्री हीटवेव (Marine Heatwaves)  का खतरा बढ़ेगा।

समुद्र में पोषक तत्वों की उपलब्धता, जैव उत्पादकता और मछलियों के वितरण पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

पूरा तटीय इकोसिस्टम प्रभावित होगा, साथ ही लहरों और ज्वार-भाटे में बदलाव से जहाजरानी (Shipping) और तटीय व्यापार की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

इनकॉइस का हाई-रिज़ॉल्यूशन नेटवर्क और एडवांस अलर्ट

तूफानों, ऊंची लहरों, समुद्री जलप्रपात और तेज धाराओं की सटीक भविष्यवाणी के लिए इनकॉइस हाई-रिज़ॉल्यूशन मॉडल का इस्तेमाल कर रहा है। इसके लिए समुद्री ग्लाइडर, बॉय (Buoys), फ्लोट और सैटेलाइट का एक पूरा नेटवर्क तैयार किया गया है, जो डेटा असिमिलेशन सिस्टम के ज़रिये सटीक अनुमान प्रदान करता है।

तटीय राज्यों (जैसे तमिलनाडु) को अब इनकॉइस द्वारा 10 दिनों तक की हवा, लहर, ज्वार, समुद्री धाराओं और तापमान की एडवांस सूचना मिलने लगी है। राज्य सरकारों के साथ मिलकर ज्वार-भाटा मापने के स्टेशन, कोस्टल बॉय और सुनामी अलर्ट प्रोग्राम तैयार किए जा रहे हैं ताकि किसी भी संकट की स्थिति में समय रहते तैयारी की जा सके।

Also Read: LG Sinha pushes for nature-based solutions as Himalayas battle climate crisis

You Might Also Like

Apple VS Samsung– Can a Good Smartwatch Save Your Life?
22 वीं सदी तक कहीं ग्लेशियर भी डायनासोर की तरह इतिहास के पन्नों में कैद न हो जाएं 
African Nations Step Up Investment in the Circular Economy
 भारत, इंडोनेशिया को देगा गेहूं बीज, मिलकर करेंगे सस्टेनेबल फार्मिंग
पर्यावरण मंजूरी देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
TAGGED:Dr Jitendra Singh El Nino Monsoon UpdateEl Nino AI Prediction INCOIS Report 2027INCOIS AI Machine Learning Weather ForecastingIndian Ocean Dipole Madden Julian Oscillation ImpactMarine Heatwaves Coastal Ecosystem El Nino
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp LinkedIn Email Copy Link Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
LinkedInFollow
Popular News
जमीनजलजैव-विविधतावीडियोस्टोरीहवा

Key Trends Developing in Global Equity Markets

ckitadmin
ckitadmin
August 29, 2021
देश में कुल रामसर स्थलों की संख्या पहुंची 101
क्या आप में पर्यावरण सम्बन्धी स्टार्टअप चलाने का जूनून है ?
हिमाचल प्रदेश ने खनिज राजस्व प्राप्ति के मामले में बनाया कीर्तिमान
Medicaid Expansion Improves Hypertension and Diabetes Control

Categories

  • जल
  • जमीन
  • जंगल
  • जैव-विविधता
  • हवा
  • खनिज
  • ऊर्जा
  • ग्रीन जॉब
  • स्टोरी
  • इम्पैक्ट फीचर
  • वीडियो

About US

Environmentpulse.com is a bilingual (Hindi-English) news platform that presents high-quality news, views, and videos related to the environment.
Quick Link
  • ग्रीन जॉब
  • ऊर्जा
  • खनिज
  • जैव-विविधता
  • जंगल
Top Categories
  • My Bookmark
  • Contact
  • Privacy Policy
Environment PulseEnvironment Pulse
© Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?