यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने जलवायु परिवर्तन और पौधों की सेहत पर नज़र रखने के लिए ‘सेंटिनल-3सी’ और ‘फ्लेक्स’ नामक दो नए उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया है।
एनवायरमेंट पल्स डेस्क: यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर बारीकी से नज़र रखने के लिए दो उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया है।
इनमें से एक उपग्रह विशेष रूप से वनस्पति (पौधों के जीवन) की निगरानी पर केंद्रित रहेगा। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चरम मौसम घटनाओं की निगरानी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से डिज़ाइन किए गए
इन दो उपग्रहों — सेंटिनल-3सी और फ्लेक्स — को ले जा रहे वेगा-सी रॉकेट ने सोमवार रात 10:21 बजे (मंगलवार 01:21 GMT) फ्रेंच गुयाना स्थित कोउरू अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी।
प्रक्षेपण के दो घंटे के भीतर ही दोनों अंतरिक्ष यान सूर्य-समकालिक कक्षा (sun-synchronous orbit) में सफलतापूर्वक स्थापित हो गए। फ्लेक्स (फ्लोरेसेंस एक्सप्लोरर) उपग्रह का मुख्य उद्देश्य गर्मी की लहरों (हीट वेव्स) का वनस्पति पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करना है।
यह पौधों में प्रकाश संश्लेषण (फोटोसिंथेसिस) की प्रक्रिया के दौरान उत्सर्जित होने वाली अत्यंत क्षीण फ्लोरेसेंस (आभा) की निगरानी करके यह जानकारी जुटाएगा। यह फ्लोरेसेंस इस बात का महत्वपूर्ण संकेतक है कि वनस्पति कितनी दक्षता से सूर्य के प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड को ऊर्जा में परिवर्तित कर रही है।
ईएसए के अनुसार, इस उपग्रह से प्राप्त आंकड़े “वैज्ञानिकों को पौधों के स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र की उत्पादकता, और पर्यावरणीय तनाव तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन करने में मदद करेंगे।”
- लागत: 35 करोड़ यूरो (लगभग 40.35 करोड़ डॉलर)
* मिशन अवधि: तीन वर्ष
- कक्षीय परिक्रमा: पृथ्वी की प्रतिदिन 14 बार परिक्रमा
- पुनरावृत्ति चक्र: प्रत्येक 27 दिन में एक ही स्थान का दोबारा अवलोकन
सेंटिनल-3सी उपग्रह समुद्री पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़े एकत्र करेगा, जिसमें तापमान, लहरों की ऊंचाई और समुद्री धाराएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह भूमि उपयोग और भूमि आवरण की भी निगरानी करेगा, ताकि कृषि उपज को अनुकूलतम बनाकर संभावित खाद्य संकटों को रोका जा सके।
सेंटिनल-3सी, कोपरनिकस कार्यक्रम का हिस्सा है — जो यूरोपीय संघ के अंतरिक्ष कार्यक्रम का पृथ्वी अवलोकन घटक है। ईएसए में पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रमों की निदेशक सिमोनेटा चेली ने इन मिशनों को “अत्यंत आवश्यक” बताते हुए कहा कि ये “हम जिस जलवायु परिवर्तन का सामना कर रहे हैं” उससे निपटने में मदद करेंगे।
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